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सांप्रदायिकता को लेकर भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कई बीजेपी नेताओं ने हिंदू धर्म का ‘अपमान’ बताया है.
रविवार को नोएडा में हुए एक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने कहा, “भारत के उपराष्ट्रपति के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा कर चुके श्रीमान हामिद अंसारी ने कल एक बयान दिया. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बयान था.”
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बीजेपी नेता शाहनवाज़ हुसैन, मुख़्तार अब्बास नक़वी समेत कई नेताओं और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कई लोगों ने हामिद अंसारी के बयान की आलोचना की है.
पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी ने शुक्रवार को दिल्ली में एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर के दौरान एजी नूरानी की एक किताब ‘द आरएसएसः अ मेनेस टू इंडिया’ का ज़िक्र करते हुए उसके कुछ अंशों को पढ़ा था.
एजी नूरानी संविधान विशेषज्ञ और जाने-माने क़ानूनविद थे. 93 साल की उम्र में साल 2024 में उनकी मृत्यु हो गई थी और उन्होंने भारत के विभाजन, कश्मीर, मानवाधिकार, चीन के साथ युद्ध और दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता समेत कई मुद्दों पर किताबें लिखी थीं.
हामिद अंसारी ने मेमोरियल लेक्चर के दौरान एजी नूरानी के कामों पर व्याख्यान दिया और उनकी किताब का एक उद्धरण दिया जिसमें ‘हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता’ के ख़तरे को लेकर जवाहरलाल नेहरू की चेतावनी का ज़िक्र किया गया था.
योगी आदित्यनाथ और बीजेपी नेताओं ने क्या कहा?
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हामिद अंसारी के बयान को लेकर बीजेपी नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि ‘ये बयान भारत की छवि को ख़राब करने की कोशिशों के एजेंडे का हिस्सा है.’
उन्होंने कहा, “कल मैं भारत में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रहे एक व्यक्ति का बयान देख रहा था. कुछ लोगों की प्रवृत्ति होती है कि वे अपने पद की गरिमा बनाए रखने में नाकाम रहते हैं. उस गरिमा के विपरीत व्यवहार करना उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है. भारत के उपराष्ट्रपति के तौर पर कार्यकाल पूरा कर चुके श्रीमान हामिद अंसारी ने कल एक बयान दिया. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बयान था.”
“उनके बयान वास्तव में डराने वाले थे. ये बयान भारत, भारतीय संस्कृति और भारतीय परंपरा के ख़िलाफ़ थे. ये बयान भारत की छवि को दुनिया भर में ख़राब करने की कुछ कोशिशों के एजेंडे का हिस्सा हैं, जिन्हें भारत विरोधी ताक़तें लगातार आगे बढ़ा रही हैं.”
सीएम योगी ने कहा, “उन्होंने भारत की सनातन परंपरा की पूरी तरह आलोचना करते हुए बयान दिए, भारत की हिंदू परंपरा का अपमान किया और इसे आतंकवाद से जोड़ने की भी कुछ कोशिशें की गईं.”
साथ ही उन्होंने कहा, “भारत और भारत का संविधान यह अपेक्षा करता है कि महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति हमेशा उस पद की गरिमा के अनुरूप आचरण करे. उनकी निजी राय अलग हो सकती है. लेकिन जब बात भारत की हो, तो भारतीय संविधान की पवित्रता का पालन करते हुए भारत की एकता और अखंडता के लिए उनका योगदान सर्वोच्च होना चाहिए.”
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने हामिद अंसारी के बयान को ‘अनुपयुक्त और अस्वीकार्य’ बताया.
समाचार एजेंसी एएनआई से उन्होंने कहा, “हिंदू समाज सबको अपनाने, सबको सम्मान देने और सबके साथ समरस होकर काम करने का काम करता है. इस तरह के बयानों से ज़रूर वैमनस्यता फैलती है और नफ़रत का भाव आता है. लेकिन देश के उपराष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी जी कभी न कभी इस तरह के बयान देते रहे हैं जो अनुचित है. इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा.”
बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज़ हुसैन ने हामिद अंसारी से माफ़ी मांगने की मांग की है.
उन्होंने कहा, “हामिद अंसारी का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ और वह आगे चलकर भारत के उपराष्ट्रपति बने. उनकी हालिया टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है और मेरे विचार से इससे मुस्लिम समुदाय के कई लोग आहत हुए हैं.”
“भारत ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के विज़न के तहत आगे बढ़ रहा है. मुसलमान शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रगति कर रहे हैं. हम शांतिपूर्ण और दंगा-मुक्त माहौल में रह रहे हैं. मेरा मानना है कि हामिद अंसारी को अपनी टिप्पणी के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए.”
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने पूर्व उपराष्ट्रपति के बयान की आलोचना की और कहा है, “आज वह वह बहुसंख्यक हिंदू समाज में कमियां निकालते हैं. यही वह समाज है, जिसने उनका सम्मान किया और उन्हें स्वीकार किया.”
ओवैसी ने क्या कहा?
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एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आलोचनाओं का सामना कर रहे हामिद अंसारी का बचाव किया है.
रविवार को उन्होंने लखनऊ में एएनआई से कहा, “वह एक बेहद प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं, जिसने देश की आज़ादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. हामिद अंसारी ने भारतीय विदेश सेवा में रहते हुए देश की अच्छी सेवा की.”
“वह एक विद्वान हैं. आप उनसे असहमत हो सकते हैं, लेकिन अगर कोई उनकी विद्वता पर सवाल उठाते हुए यह कहे कि उन्हें देश से प्यार नहीं है, तो मैं इस बात पर बिल्कुल विश्वास नहीं करता.”
एआईएमआईएम के महाराष्ट्र के नेता वारिस पठान ने कहा, “वह पूर्व उपराष्ट्रपति रहे हैं. आप देख सकते हैं कि क्या हो रहा है. बीजेपी ने ‘ऑपरेशन मुस्लिम’ और ‘ऑपरेशन मस्जिद’ शुरू कर दिया है. मुसलमानों को हर तरह से निशाना बनाया जा रहा है. हमारी मस्जिदों को डिमोलिश कर दिया जाता है और हाई कोर्ट जाने का टाइम नहीं देते हैं. हर जगह नोटिस दे देकर हमारी मस्जिदों, मदरसों को निशाना बनाया जाता है. सब तरफ़ पाबंदी लगाई जा रही है.”
वारिस पठान ने आरोप लगाया, “बीजेपी सरकार ने मुसलमानों के ख़िलाफ़ एक जंग सी छेड़ दी है. देख लीजिए वो देश को किस ओर ले जा रहे हैं. और बात करते हैं सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की. इस तरह से विश्वास हासिल होता है?”
उधर, ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजे़शन के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने हामिद अंसारी के बयान की निंदा की है.
उन्होंने कहा, “मुसलमानों के हवाले से हामिद अंसारी ने जो बयान दिया है उसकी मैं पुरज़ोर मज़म्मत (निंदा) करता हूं. हामिद अंसारी अब मुसलमानों के नाम पर राजनीति में उतरना चाहते हैं, लेकिन जब वह बड़े पदों पर थे, तब उन्हें मुसलमान याद नहीं आए.”
“आज जब मुसलमान उनके बारे में नहीं पूछ रहे हैं, तो उन्हें लगता है कि उन्हें मुसलमानों के नाम का इस्तेमाल करके राजनीति करनी चाहिए. लेकिन मुसलमान समझदार हैं. वे इस तरह के बयानों और उनकी मंशा को समझते हैं. मुझे लगता है कि इस तरह की बयानबाज़ी के ज़रिए देश का माहौल ख़राब करने की यह कोई बड़ी साज़िश या योजना लगती है.”
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने क्या कहा था?
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पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 18 सितंबर को नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में व्याख्यान दिया था.
उन्होंने एजी नूरानी के कार्यों का ज़िक्र करते हुए कहा था, “एक किताब-‘द आरएसएस: ए मेनेस टू इंडिया’ 2019 में प्रकाशित हुई थी. नूरानी ने किताब के परिचय की पहली पंक्ति में जो शेर लिखा था, वह आज भारत में मुस्लिम भावना के बारे में उनके वर्णन को सही तौर पर समेटता है.”
“सरज़मीन-ए-हिंद पर अक़वाम-ए-आलम के, फ़िराक़
क़ाफ़िले आते रहे और हिंदुस्तान बनता गया
जब गुलिस्तां को लहू की ज़रूरत पड़ी, सबसे पहले हमारी ही गर्दन कटी
फिर भी कहते हैं हमसे ये अहल-ए-चमन, ये चमन है हमारा, तुम्हारा नहीं”
हामिद अंसारी ने आगे कहा, “इस किताब के परिचय में उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक में जवाहरलाल नेहरू की कही बात का ज़िक्र किया था. इस बात को तत्कालीन विदेश सचिव गुंडेविया ने भविष्य के लिए दर्ज किया था. मैं उन शब्दों को उद्धृत करता हूं: ‘भारत के लिए ख़तरा, ध्यान रहे, कम्युनिज़्म नहीं है, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है’.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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