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हिन्दी दिवस: जानिए हिन्दी को क्यों नहीं दिया गया है राष्ट्रभाषा का दर्जा

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Sep 14, 2026


हिन्दी पढ़ाती अध्यापक

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 से अनुच्छेद 351 के रूप में जो क़ानून बना उसमें हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिया गया (सांकेतिक तस्वीर)
सारांश

  • 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 से अनुच्छेद 351 के रूप में जो क़ानून बना उसमें हिन्दी को राष्ट्रभाषा नहीं बल्कि राजभाषा का दर्जा दिया गया.
  • तभी से 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाये जाने की शुरुआत हुई.
  • 1960 के दशक में ग़ैर-हिन्दी भाषी राज्यों में हुई कई हिंसक झड़पों के बाद देश की संसद ने एक राष्ट्रभाषा के विचार को त्याग दिया.
  • पिछली जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि भारत के 43.63 प्रतिशत लोग हिन्दी बोलते हैं.
  • ये लेख बीबीसी न्यूज़ हिन्दी पर पहली बार 21 अगस्त 2022 को प्रकाशित हुआ था.

उत्तराखंड के एक छोटे से क़स्बे रामनगर में बिताया अपना शुरुआती लड़कपन याद करता हूँ तो दो तरह के बच्चे याद आते हैं.

एक मेरे जैसे वे जो टाई पहन कर प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाते थे जबकि दूसरी तरह के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे और उनकी पोशाक से उनकी आर्थिक हैसियत का एहसास होता था.

प्राइवेट स्कूल के बच्चों को नर्सरी क्लास से अंग्रेज़ी पढ़ाई जाती जबकि सरकारी स्कूलों में एबीसीडी सिखाए जाने की शुरुआत छठी कक्षा से होती थी.

उन दिनों प्राइवेट स्कूल अक्सर पांचवीं तक के होते थे. हर छोटे शहर-क़स्बे में आबादी के हिसाब से एक या दो सरकारी इंटर कॉलेज हुआ करते.

पाँचवीं पढ़ने के बाद सरकारी और प्राइवेट, दोनों तरह के स्कूलों के बच्चे इन इंटर कॉलेजों की छठी कक्षाओं में साथ पढ़ने लगते थे.

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