Movie Review
बंटवारा 1947
कलाकार
सनी देओल
,
प्रीति जिंटा
,
शबाना आजमी
,
अली फजल
,
करण देओल
और
अभिमन्यु सिंह
लेखक
राजकुमार संतोषी, असगर वजाहत (नाटक जिस लाहौर नइ वेख्या, ओ जम्याइ नइ पर आधारित)
निर्देशक
राजकुमार संतोषी
निर्माता
आमिर खान, अपर्णा पुरोहित
सनी देओल और प्रीति जिंटा की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। कहानी 1947 के बंटवारे से शुरू होती है। दंगे हैं। लाहौर जाने की मजबूरी है। एक मुस्लिम परिवार है। बेटा पीछे छूट जाता है। उधर लाहौर में एक हिंदू बूढ़ी मां है। वह अपना घर छोड़ने को तैयार नहीं। हवेली पर कब्जे की राजनीति भी शुरू हो जाती है। मजहबी नफरत भी है। यानी पार्टिशन ड्रामा का पूरा मसाला मौजूद है।
पहले आधे घंटे तक लगता है… अच्छा, मामला जम सकता है। लेकिन फिर फिल्म अपनी ही जगह पर घूमने लगती है। कुछ देर बाद कहानी से ज्यादा आपका ध्यान सनी देओल पर चला जाता है। अब सनी कब आएंगे? अगला लंबा डायलॉग कब शुरू होगा? और यही फिल्म की सबसे बड़ी परेशानी है। कहानी में कहने को बहुत कुछ है। लेकिन फिल्म दिखाने से ज्यादा समझाती है। नतीजा? कई जगह लगता है..अब बस भी करो।