डिजिटल डेस्क, विजयवाड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने गाडे साईं कृष्णा का केस अपने हाथ में ले लिया है। इस मामले में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश पुलिस से सवाल पूछे कि इस मामले में FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई। साईं कृष्णा को मजिस्ट्रेट के सामने पेश क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने CCTV फुटेज डिलीट करने के बारे में सवाल किए।
सीलबंद लिफाफे में जमा किए जाएं रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में चल रही संबंधित कार्यवाही पर रोक लगा दी और आदेश दिया कि केस के रिकॉर्ड 30 सितंबर तक सीलबंद लिफाफे में जमा किए जाएं। इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
कोर्ट ने संबंधित कार्यवाही में CBI को भी एक पक्ष (रेस्पोंडेंट) के तौर पर शामिल किया। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या जांच मुख्य रूप से निचले स्तर के कर्मचारियों पर केंद्रित रही, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े मुद्दों पर कोई जवाब नहीं मिला।
इस मामले को लेकर YSRCP सांसद मड्डिला गुरुमूर्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया। इस याचिका में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई।
क्या है मामला?
मई 2026 में साईं कृष्णा को गैर-जमानती वारंट के तहत टास्क फोर्स के कर्मचारियों ने हिरासत में लिया और कृष्णालंका पुलिस स्टेशन ले गए। सुप्रीम कोर्ट में ये बात सामने आई कि साईं कृष्णा को हिरासत में लेने के बाद भी मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया।
जांच में आरोप लगाया गया है कि पुलिस स्टेशन में साईं कृष्णा के साथ मारपीट की गई, बाद में उसे एक सुनसान इमारत में ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई, और फिर उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री और YSRCP अध्यक्ष YS जगन मोहन रेड्डी ने DGP और विजयवाड़ा पुलिस कमिश्नर से जवाबदेही की मांग की है और CBI जांच की मांग की है।
YSRCP नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस दखल को चंद्रबाबू नायडू सरकार के लिए एक झटका बताया है। इस बीच, सत्ताधारी TDP के नेतृत्व वाले गठबंधन और विपक्षी YSR कांग्रेस पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।