राजधानी भोपाल की हाईप्रोफाइल त्विषा शर्मा संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भोपाल ट्रायल कोर्ट में चालान प्रस्तुत कर दिया है, लेकिन अभी भी त्विषा के परिजनों की ओर से कई ऐसे सवाल उठाए जा रहे हैं, जिनके जवाब उन्हें नहीं मिले हैं। परिजनों के अधिवक्ता ने चालान का काफी अध्ययन किया। इसके बाद त्विषा के परिजनों की ओर से प्रतिक्रिया आई है कि आखिर त्विषा शर्मा 12 मई की सुबह जिस ब्यूटी पार्लर में पहुंची थी, उसका सीसीटीवी फुटेज कौन निकलवाने गया था? उन्हें फुटेज निकलवाने के लिए किसने भेजा था और किसने आदेश दिया था? क्या वह अपराध की श्रेणी में नहीं आता? ऐसी स्थिति में जब वह न्यायालय में बतौर साक्ष्य प्रस्तुत किया जा सकता है।
आधा दर्जन चोट के निशान कहां से आए थे?
त्विषा जब 12 मई की सुबह ब्यूटी पार्लर पहुंची तो उसके शरीर पर चोट के कहीं निशान नहीं थे। क्योंकि चोट के निशान होते तो ब्यूटी पार्लर की संचालिका और कर्मचारियों से पुलिस और CBI पूछताछ कर चुकी है, किसी को तो वह यह बात बताते। कई मीडिया वालों ने भी ब्यूटी पार्लर के कर्मचारियों से बातचीत की है, लेकिन चोट का जिक्र किसी ने नहीं किया। तब भोपाल एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्विषा के सिर सहित शरीर के अन्य अंगों में करीब आधा दर्जन चोट के निशान कहां से आए थे?
बॉडी को प्रिजर्व करने में भी गफलत का जिम्मेदार कौन?
त्विषा शर्मा के परिजनों ने सवाल उठाए हैं कि दिल्ली एम्स के वरिष्ठ चिकित्सकों के बोर्ड ने 24 मई को जब दोबारा पोस्टमार्टम किया तो त्विषा के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले थे। दिल्ली एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में त्विषा शर्मा के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिलने को लेकर परिजनों ने भोपाल एम्स पर भी सवाल खड़े किए हैं।
परिजनों के अधिवक्ता ने कहा कि परिजनों का आरोप है कि भोपाल एम्स पहले से त्विषा की सास, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के प्रभाव में कार्य कर रहा था। गिरिबाला सिंह की बहन भोपाल की वरिष्ठ चिकित्सक हैं और घटना वाली रात और पीएम के समय वह एम्स में मौजूद थीं। इसके बाद भोपाल एम्स ने बॉडी डिकंपोज होने और उसे लंबे समय तक प्रिजर्व कर रखने में असमर्थता जताते हुए भोपाल अदालत में आवेदन भी लगाया था। ऐसे में संभव है कि बॉडी डिकंपोज होना शुरू हो गई थी, जिस कारण दिल्ली एम्स की पीएम रिपोर्ट में त्विषा के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं।
फंदे की बेल्ट डॉक्टरों को क्यों नहीं सौंपी गई?
त्विषा मामले में सीबीआई की 636 पन्नों की चार्जशीट और गवाहों के बयानों से अब केवल मानसिक प्रताड़ना के आरोप ही नहीं, बल्कि घटना के बाद की पुलिस कार्रवाई और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। 12 मई की रात करीब 9:36 बजे त्विषा ने अपनी मां को संदेश भेजकर अपनी स्थिति और मानसिक पीड़ा जाहिर की। रात करीब 10:23 बजे के बाद उन्हें घर से बाहर ले जाने और रात करीब 10:55 बजे एम्स में जांच के बाद मृत घोषित किए जाने का घटनाक्रम चार्जशीट में दर्ज है।
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एसआई से सीबीआई ने पूछे कई सवाल
इस मामले में मर्ग कायम करने वाले कटारा हिल्स थाने के उप निरीक्षक दिनेश शर्मा के बयान के मुताबिक, 13 मई को रात 12:30 बजे यानी 12-13 मई की दरमियानी रात उन्हें एम्स भोपाल से सूचना मिली कि त्विषा ने घर की छत पर फांसी लगा ली है। इसके बाद करीब 2:30 से 3 बजे पुलिस बागमुगालिया स्थित घर की छत पर पहुंची। वहां लोहे के पाइप से नायलान की दो काली बेल्टनुमा पट्टियां लटकी मिलीं। पास में पलंग, गद्दे-कपड़े और लाल रंग का मोबाइल था। एसआई शर्मा के अनुसार, कमरे को सील किया गया और छत के दरवाजे पर कुंडी लगाई गई, लेकिन CBI की पूछताछ में यह सवाल उभरा कि जिस छत पर फंदा मिला था, उसे पूरी तरह सील क्यों नहीं किया गया। सीबीआई ने दिनेश शर्मा से पूछा कि फंदे में इस्तेमाल नायलान बेल्ट पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों को क्यों नहीं सौंपी गई? उन्होंने तबीयत खराब होने की बात कहते हुए इसकी जानकारी नहीं होने की बात कही।
ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। जब सीबीआई की चार्जशीट में भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल सामने आ रहे हैं तो किसी पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? परिजन अगली पेशी में इन सवालों के साथ अन्य सवाल अदालत के समक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं।