डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आम जनता और छोटे व्यापारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर स्पष्ट किया है कि 2 हजार तक के UPI ट्रांजेक्शन और RuPay डेबिट कार्ड पमेंट पर कोई भी बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं लगा सकता।
क्या कहता है सरकार का नोटिफिकेशन
सरकार के इस आदेश के मुताबिक, 2 हजार तक के इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट लेने या देने वाले किसी भी व्यक्ति पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल के कानूनी बदलावों के बाद आम यूजर्स पर भी डिजिटल पेमेंट चार्ज लगने की अटकलें तेज हो गई थीं।
वित्त मंत्रालय ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि हाल ही में संसद द्वारा पास किए गए टैक्सेशन एंड अदर लॉज बिल, 2026 का मकसद आम लोगों पर बोझ डालना नहीं, बल्कि UPI इकोसिस्टम की तकनीकी मजबूती और सुरक्षा को बढ़ाना है।
बड़े मर्चेंट्स पर लग सकता है MDR शुल्क
हालिया संशोधन ने पेमेंट एंड Setllment सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A में बदलाव किया था, जिससे 50 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाले बड़े व्यापारियों (जैसे Amazon, Flipkart आदि) को मिली टैक्ट छूट खत्म हो गई थी।
इस बदलाव से बड़े मर्चेंट्स पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने का रास्ता साफ हो गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 2 हजार से ज्यादा मूल्य वाले पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर लगभग 0.4 प्रतिशत का MDR लगाया जा सकता है।
आंकड़ों में UPI का विस्तार
वर्ष 2025-26 के आंकड़े देश में डिजिटल पेमेंट की विशालता को दर्शाते हैं।
कुल ट्रांजैक्शन: वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ₹314 लाख करोड़ मूल्य के 24,000 करोड़ से अधिक UPI ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए।
2,000 से अधिक के पेमेंट: P2M UPI भुगतानों में संख्या के हिसाब से 2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन केवल 4 प्रतिशत थे, लेकिन मूल्य के मामले में यह 4 प्रतिशत हिस्सा कुल UPI लेनदेन का लगभग दो-तिहाई था।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का वित्तीय संतुलन
बैंक और पेमेंट कंपनियां लंबे समय से शिकायत कर रही हैं कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने का खर्च लगातार बढ़ रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने संसद की स्टैंडिंग कमिटी को बताया था कि पेमेंट इंडस्ट्री को P2M ट्रांजैक्शन के लिए सालाना 20,700 करोड़ का खर्च उठाना पड़ रहा है।
मार्च में फाइनेंस पर बनी स्टैंडिंग कमिटी ने भी माना था कि MDR न होने से यह इकोसिस्टम आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रह पा रहा है।
सरकार की इंसेंटिव स्कीम
छोटे व्यापारियों और बैंकों की वित्तीय भरपाई के लिए सरकार इंसेंटिव स्कीम चला रही है, जिसके तहत ट्रांजैक्शन वैल्यू का अधिकतम 0.15 प्रतिशत सब्सिडी के रूप में दिया जाता है।
2024-25 में जारी सब्सिडी: 1,922.77 करोड़
2025-26 में जारी सब्सिडी: 2,196.21 करोड़
2026-27 के बजट में अनुमान: 2,000 करोड़
इस कदम से स्पष्ट है कि सरकार आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल पेमेंट को पूरी तरह मुफ्त रखते हुए, बड़े व्यावसायिक लेन-देन के ज़रिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते खर्च को संतुलित करने की नीति पर काम कर रही है।