अमेरिका ने ईरान पर अपना आर्थिक शिकंजा और ज्यादा कस दिया है। मंगलवार को अमेरिका ने ईरान से जुड़े कई बड़े वित्तीय नेटवर्क और तेल ले जाने वाले जहाजों पर नए और कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह बड़ी और सख्त कार्रवाई ईरान को उस भारी-भरकम पैसे से रोकने के लिए की गई है, जिसका इस्तेमाल वह दुनिया भर में अपनी ताकत बढ़ाने और गलत कामों के लिए करता है। इस नए आदेश के तहत 50 से अधिक कंपनियों, व्यक्तियों और तेल जहाजों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका का सीधा आरोप है कि ये सभी ईरान को पुराने प्रतिबंधों से बचने और अरबों डॉलर की काली कमाई करने में मदद कर रहे थे। यह एक बहुत बड़ी खबर है और इसका असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर देखने को मिलेगा।
इस पूरी कार्रवाई का ऐलान अमेरिकी वित्त विभाग के ‘विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय’ (ओएफएसी) ने किया है। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। उनके प्रशासन ने ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ (आर्थिक क्रोध) नाम के एक बड़े अभियान के तहत यह अहम कदम उठाया है। इस अभियान का मुख्य मकसद पश्चिम एशिया में चल रहे भारी विवाद और तनाव के बीच ईरान पर दबाव को और ज्यादा बढ़ाना है। अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, इन नए प्रतिबंधों में ईरान की एक बहुत बड़ी विदेशी मुद्रा विनिमय (करेंसी एक्सचेंज) कंपनी ‘अमीन एक्सचेंज’ को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), तुर्किये, हांगकांग और चीन में छिपकर काम कर रही कई अन्य फर्जी कंपनियों पर भी बड़ा एक्शन लिया गया है।
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अमेरिका ने किन कंपनियों और बैंकों को किया है टारगेट?
अमेरिका ने आरोप लगाया है कि इस बड़े नेटवर्क ने प्रतिबंधित ईरानी बैंकों और ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल (रसायन) क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों की ओर से करोड़ों डॉलर का लेनदेन किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान का यह गुप्त बैंकिंग सिस्टम आतंकवाद फैलाने के लिए अवैध रूप से पैसे भेजने का काम करता है। उन्होंने यह भी बताया कि जैसे-जैसे अमेरिका अपने ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ अभियान के तहत तेहरान के इस छिपे हुए बैंकिंग सिस्टम को खत्म कर रहा है, वैसे-वैसे दुनिया भर के वित्तीय संस्थानों को भी बहुत ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है ताकि उनके सिस्टम का गलत इस्तेमाल न हो सके।
ईरान के तेल जहाजों को लेकर अमेरिका ने क्या बड़ा खुलासा किया है?
अमेरिकी वित्त विभाग ने 19 ऐसे जहाजों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिन पर ईरान का तेल, लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी), मेथनॉल और पेट्रोकेमिकल उत्पाद विदेशों में भेजने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन जहाजों के जरिए ईरान ने करोड़ों डॉलर की कमाई की और इस पैसे का इस्तेमाल अपनी सेना और आतंकी गुटों को मजबूत करने में किया। अमेरिका का आरोप है कि ईरान प्रतिबंधों से बचने के लिए विदेशी झंडे वाले जहाजों की एक शैडो फ्लीट (गुप्त बेड़ा) का इस्तेमाल करता है।
विदेशी कंपनियों को अमेरिका ने क्या सख्त चेतावनी दी है?
अमेरिकी सरकार ने साफ कर दिया है कि इन कड़े उपायों का मकसद ईरान को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम से पूरी तरह बाहर करना है। इसके साथ ही अमेरिकी वित्त विभाग ने विदेशी कंपनियों और बैंकों को भी सख्त चेतावनी दी है। अमेरिका ने कहा है कि अगर कोई भी कंपनी या बैंक ईरान के व्यापार का समर्थन करता पाया गया, तो उस पर भी गंभीर प्रतिबंध (सेकेंडरी सैंक्शंस) लगाए जा सकते हैं। इस चेतावनी में चीन की स्वतंत्र तेल रिफाइनरियों से जुड़े लेनदेन भी शामिल हैं। नए आदेश के बाद, अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी प्रतिबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की संपत्ति पूरी तरह से ब्लॉक (जब्त) कर ली गई है।