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पश्चिम एशिया जंग का असर:रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा जापान का व्यापार घाटा, पीएम सनाए तकाइची ने क्या की तैयारी? – Japan Trade Deficit Record High Oil Imports West Asia Conflict Sanae Takaichi

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Oct 21, 2026


japan trade deficit record high oil imports west asia conflict Sanae Takaichi

जापान का व्यापार घाटा
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम एशिया संघर्ष और महंगे तेल आयात के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जापान का व्यापार घाटा 2.81 ट्रिलियन येन (एक लाख 68 हजार करोड़ भारतीय रुपए) तक पहुंच गया है। वित्त मंत्रालय के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-सितंबर की अवधि में जापान का निर्यात पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 18.4 प्रतिशत बढ़कर 63.5 ट्रिलियन येन (लगभग 37.96 लाख करोड़ भारतीय रुपये) हो गया, जबकि आयात 20.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 66.3 ट्रिलियन येन (लगभग 39.64 लाख करोड़ भारतीय रुपये) तक पहुंच गया।


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क्या है महंगाई का असल कारण?

ये दोनों ही जापान के लिए अब तक के रिकॉर्ड स्तर हैं। तेल की बढ़ती कीमतों का असर प्लास्टिक के सामान और शिपिंग लागत सहित कई क्षेत्रों पर पड़ता है। प्राकृतिक संसाधनों की कमी वाले जापान को अपना लगभग सारा तेल आयात करना पड़ता है। इसके लिए वह पश्चिम एशिया में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते पर निर्भर रहा है। फिलहाल यह रास्ता लगभग बंद हो गया है, जिसके कारण जापान को अन्य मार्गों से तेल मंगाने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमत फरवरी में 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो हाल के महीनों में बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थी और अभी लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। जानकारों का मानना है कि कीमतों में जल्द कमी आने की संभावना कम है। सितंबर के महीने में जापान का व्यापार घाटा 536.6 अरब येन (लगभग 3,207.3 करोड़ भारतीय रुपए) रहा। यह लगातार पांचवां महीना है जब जापान को व्यापार घाटे का सामना करना पड़ा है, हालांकि अगस्त के 1.1 ट्रिलियन येन के घाटे की तुलना में यह आंकड़ा कम है।

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सितंबर में जापान का आयात पिछले साल के मुकाबले 18.9 प्रतिशत बढ़ा, जबकि निर्यात में 16.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एक चिंता का विषय जापानी मुद्रा ‘येन’ का कमजोर होना भी है, जिससे आयात की लागत बढ़ जाती है। हाल के दिनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले येन 150 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। जापान के केंद्रीय बैंक ने अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कई वर्षों तक ब्याज दरों को शून्य या उसके आसपास बनाए रखा था। अब वह धीरे-धीरे ब्याज दरें बढ़ा रहा है, जिसका एक उद्देश्य येन की स्थिति को मजबूत करना भी है। पिछले महीने, बैंक ऑफ जापान ने बेंचमार्क ब्याज दर को 1.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया, जो 31 वर्षों का उच्चतम स्तर है।

अगले हफ्ते इसकी मौद्रिक नीति समिति की फिर से बैठक होने वाली है। बैंक का महंगाई का लक्ष्य लगभग 2 प्रतिशत है। जापानी सरकार ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि वह बैंक ऑफ जापान के साथ मिलकर काम कर रही है। प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की सरकार, कम आय वाले परिवारों को बढ़ती कीमतों से निपटने में मदद करने के लिए, खाद्य पदार्थों पर लगने वाले टैक्स को 8 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत करने का वादा कर रही है। इस बिल पर अभी संसद में चर्चा चल रही है।

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