• Tue. Aug 4th, 2026

24×7 Live News

Apdin News

भारत के युवाओं का गुस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती क्यों बन गया है?

Byadmin

Aug 4, 2026


मुंबई में क्लाइमेट एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के समर्थन में हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों को हिरासत लेते हुए.

इमेज स्रोत, Ashish Vaishnav/SOPA Images/LightRocket via Getty Images

इमेज कैप्शन, मुंबई में क्लाइमेट एक्टिविस्ट और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के समर्थन में हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों को हिरासत लेते हुए.

प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र बार-बार लीक होने से नाराज़ जेन ज़ी के प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पिछले महीने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर होना पड़ा.

उनके पद छोड़ने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तत्काल संकट से उबरने में मदद मिली है, लेकिन युवाओं की नाराज़गी को नियंत्रित रखना उनकी सरकार के लिए लंबे समय तक एक बड़ी चुनौती बना रह सकता है.

पीएम मोदी ने पेपर लीक मामलों में अभियुक्तों पर तेज़ी से मुकदमा चलाने के लिए फ़ास्ट-ट्रैक अदालतों की घोषणा की और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए नंदन नीलेकणि को सरकारी प्रयास की अगुवाई सौंप दी.

लेकिन युवाओं की चिंता को कम करने के लिए इससे कहीं अधिक व्यापक प्रयास की ज़रूरत पड़ सकती है. युवाओं का कहना है कि उनका ऐसी व्यवस्था से धैर्य टूट रहा है, जो उन्हें नौकरियों के अवसर या ऐसा शिक्षा तंत्र नहीं दे पा रही जो उन्हें ढंग के रोज़गार दिला सके.

अर्थशास्त्री और ‘इंडिया आउट ऑफ़ वर्क: रीथिंकिंग इंडियाज़ ग्रोथ स्टोरी’ नामक नई किताब के लेखक संतोष मेहरोत्रा ने बीबीसी से कहा, “पिछले 10 सालों में लेबर मार्केट की हालत बहुत तंग हो गई है. ग़ैर-कृषि क्षेत्र की नौकरियां नहीं बढ़ रही हैं और वास्तविक मज़दूरी बढ़ोत्तरी नहीं हुई है.”

By admin