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‘मुस्लिम पड़ोसियों को छोड़ना बुज़दिली’: कश्मीर का सर्वानंद कौल हत्याकांड जिसकी 36 साल बाद खुली फ़ाइल

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Aug 24, 2026


सर्वानंद कौल

इमेज स्रोत, Kaul Family

इमेज कैप्शन, सर्वानंद कौल

जब दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग ज़िले के सोफ़ शाली गांव में 30 अप्रैल 1990 की सुबह मोहम्मद अहसान नज़र ने अपने पड़ोस से महिलाओं के ज़ोर-ज़ोर से रोने की आवाज़ें सुनीं, तो वो घबरा गए.

उनके पड़ोसी सर्वानंद कौल ‘प्रेमी’ और उनके बेटे वीरेंद्र कौल को पिछली रात नक़ाबपोश बंदूक़धारियों ने अगवा कर लिया था. वो एक सम्मानित कश्मीरी पंडित शिक्षक, समाजसेवी और कवि थे.

अहसान नज़र ने बीबीसी को बताया कि उन्हें इस घटना से गहरा दुख पहुंचा था. उन्होंने कहा कि जब उनके घर में खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं होता था, तब प्रेमी का घर हमेशा उनके लिए खुला रहता था.

उन्होंने कहा, “प्रेमी जी एक नेक और साफ़-दिल इंसान थे. हम सभी को उम्मीद थी कि वह और उनका बेटा, जो हाल ही में पिता बना था, जल्द ही सकुशल घर लौट आएंगे.”

1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीर में चरमपंथ के बढ़ने के साथ ही लक्षित हमलों की एक लहर चली. इसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित जम्मू और देश के अन्य हिस्सों की ओर पलायन कर गए.

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