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हिंदुत्व का चेहरा, TMC की रग-रग जानने वाले… वो 5 कारण, जिसकी वजह से भाजपा ने सुवेंदु को चुना बंगाल का सीएम

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May 8, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी ने सुवेंदु अधिकारी को अपनी पहली सरकार का चेहरा घोषित किया है। 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत किया।

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वर्षों तक खुद को टीएमसी के सबसे मजबूत विरोधी के रूप में स्थापित करने वाले अधिकारी अब राज्य की सत्ता संभालगें। उनकी जमीनी लोकप्रियता, चुनावी सफलता और संगठनात्मक क्षमता ने उन्हें भाजपा नेतृत्व की स्वाभाविक पसंद बनाया।

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ममता को गढ़ में दो बार हराया

सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद सौपने का सबसे बड़ा कारण भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराना रहा। ममता का गृह क्षेत्र माना जाने वाला भवानीपुर उनका राजनीतिक किला था, लेकिन अधिकारी ने यहां 73,917 वोट हासिल कर ममता को 15,105 वोटों से मात दी। इससे पहले 2021 में नंदीग्राम में भी उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था।

भवानीपुर की यह जीत प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई क्योंकि यह सीट लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का सबसे सुरक्षित गढ़ मानी जाती रही है। दो बार ममता को सीधे चुनौती देकर अधिकारी ने भाजपा के भीतर अभूतपूर्व कद हासिल कर लिया। पार्टी के अंदर कई दावेदार थे, लेकिन नंदीग्राम और भवानीपुर की जीत ने किसी को भी उनके करीब नहीं पहुंचने दिया।

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TMC की रणनीति पर अंदरूनी जानकारी

सुवेंदु अधिकारी टीएमसी की कार्यप्रणाली को अंदर से जानने वाले नेता हैं। उन्होंने 2020 में पाला बदलने से पहले दो दशक से अधिक समय तृणमूल कांग्रेस में बिताया है। कांग्रेस से राजनीतिक सफर शुरू कर 1998 में टीएमसी में शामिल हुए अधिकारी 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

2009 और 2014 में तामलुक से सांसद रहने के बाद 2016 में नंदीग्राम से विधायक बने और ममता सरकार में मंत्री भी रहे। टीएमसी की संगठनात्मक संरचना, मतदाता नेटवर्क और चुनावी रणनीतियों की गहरी समझ उन्हें भाजपा के लिए खास बनाती है। टीएमसी छोड़ने के बाद वे पार्टी के सबसे आक्रामक विरोधी चेहरे बन गए और 2021 में नंदीग्राम में ममता को हराकर विपक्ष का नेता बन गए।

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हिंदुत्व की अपील और बीजेपी की रणनीति 

अधिकारी हिंदू वोटों को एकजुट करने में सफल रहे। नंदीग्राम में टीएमसी उम्मीदवार पबित्रा कर को 9,665 वोटों से हराने के बाद उन्होंने खुलकर कहा था, ‘नंदीग्राम के हिंदू लोगों ने मुझे जिताया है। वहां सभी मुस्लिम वोट टीएमसी को गए।’

भाजपा की हिंदुत्व-प्रेरित राजनीति और बंगाल में हिंदू एकजुटता की रणनीति के साथ यह अपील पूरी तरह मेल खाती है। राम नवमी रैलियों का नेतृत्व, ‘राम राज्य’ का आह्वान और टीएमसी पर अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के आरोप लगाते हुए उन्होंने पार्टी के मूल समर्थक वर्ग को मजबूती से जोड़ा।

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मुखर आक्रामक नेता: विपक्ष से सत्ता तक

पूरे चुनाव प्रचार में सुवेंदु अधिकारी मुखर और आक्रामक रहे। घुसपैठ, कानून-व्यवस्था और तुष्टीकरण जैसे मुद्दों पर टीएमसी पर हमलावर रुख अपनाते हुए उन्होंने खुद को भाजपा की सबसे सशक्त हिंदुत्ववादी आवाज के रूप में स्थापित किया।

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कोई और विकल्प नहीं

भाजपा की 207 सीटों की शानदार जीत और टीएमसी के 80 सीटों पर सिमट जाने के बाद अधिकारी की छवि राज्य में पार्टी के निर्विवाद चेहरे के रूप में और मजबूत हो गई। अग्निमित्रा पॉल और दिलीप घोष जैसे अन्य नेताओं ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन अधिकारी का जमीनी प्रभाव और राजनीतिक कद सबसे ऊंचा रहा।

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